पढ़ें: बदला लेने का अनोखा ढंग
Class 6 Hindi · Chapter 2: गोल · NCERT मल्हार section पृ. 13
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पढ़ने से पहले: “गोल” शब्द सुनकर आपके मन में क्या आता है? गोल गेंद, गोल रोटी, गोल चाँद? यह पाठ एक खास तरह के गोल और उसे करने वाले महान खिलाड़ी के बारे में है। यह मेजर ध्यानचंद के संस्मरण (अपनी यादों पर आधारित लेख) का एक अंश है।
घटना (हमारे शब्दों में): बात सन् 1933 की है। ध्यानचंद पंजाब रेजिमेंट की ओर से सैंपर्स एंड माइनर्स टीम के विरुद्ध खेल रहे थे। विरोधी खिलाड़ी उनसे गेंद छीन नहीं पा रहे थे। तभी एक खिलाड़ी ने गुस्से में उनके सिर पर हॉकी स्टिक मार दी। उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया।
अनोखा बदला: थोड़ी देर बाद ध्यानचंद पट्टी बाँधकर लौटे और उस खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर बोले कि चिंता मत करो, बदला ज़रूर लूँगा। वह खिलाड़ी डर गया और हर समय यही देखता रहा कि कब उस पर वार होगा। इधर ध्यानचंद ने झटपट छह गोल कर दिए! मैच के बाद उन्होंने उसकी पीठ थपथपाकर समझाया कि खेल में इतना गुस्सा ठीक नहीं; अगर वह न मारता तो शायद वे केवल दो ही गोल करते। वह खिलाड़ी बहुत शर्मिंदा हुआ।
सीख: ध्यानचंद कहते हैं कि बुरा काम करने वाला हर समय डरता रहता है कि उसके साथ भी बुरा होगा। उन्होंने बदला हिंसा से नहीं, खेल से लिया। यही सच्ची खेल भावना है।
खोजिए: खेल भावना या नहीं?
- हर काम को सही समूह में रखिए।
Remember
- 1933 के मैच में चोट खाकर भी ध्यानचंद ने छह गोल करके “बदला” लिया।
- बुरा काम करने वाला हमेशा डरता रहता है; बदला खेल भावना से लेना चाहिए।
Quick check
ध्यानचंद ने बदला कैसे लिया?
- छह गोल करके
- हॉकी मारकर
- शिकायत करके
- मैच छोड़कर
Answer
छह गोल करके. उन्होंने खेल से जवाब दिया।
Think about it
अगर आप ध्यानचंद की जगह होते तो क्या करते?
One answer
मैं भी गुस्से की जगह अपने खेल पर ध्यान देता, अच्छा खेलकर जवाब देता और बाद में उस खिलाड़ी को शांति से समझाता कि खेल में हिंसा ठीक नहीं।
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