पढ़ें: प्रेम, परोपकार और छोटे का महत्व
Class 6 Hindi · Chapter 5: रहीम के दोहे · NCERT मल्हार section पृ. 45–46
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पढ़ने से पहले: दोहा दो पंक्तियों की छोटी कविता होती है जिसमें बड़ी बात कही जाती है। आपने कबीर, तुलसी या रहीम का कोई दोहा सुना है? रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना) भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि थे। माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ। उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा में नीति, भक्ति और प्रेम के दोहे लिखे, जो आज भी लोगों की ज़बान पर हैं।
दोहा 1: “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।” भाव: बड़ी चीज़ों को देखकर छोटी चीज़ को फेंक मत दो। जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार क्या करेगी? सिलाई (जोड़ने) का काम सुई ही कर सकती है। हर छोटी-बड़ी चीज़ और हर व्यक्ति का अपना महत्व है, इसलिए सबका सम्मान करो।
दोहा 2: “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।” भाव: पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते, तालाब अपना पानी खुद नहीं पीते। वैसे ही सज्जन लोग दूसरों की भलाई के लिए धन जोड़ते हैं। यह परोपकार की सीख है, जो हमें प्रकृति से मिलती है।
दोहा 3: “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।” भाव: प्रेम का रिश्ता एक नाज़ुक धागे जैसा है; उसे झटके से मत तोड़ो। टूटा धागा फिर जुड़ता नहीं, और जुड़ भी जाए तो बीच में गाँठ पड़ जाती है। यानी रिश्ते में दरार आए तो मन में खटास रह जाती है। लोक में इसका एक रूप “मत तोड़ो चटकाय… टूटे से फिर ना जुड़े” भी प्रचलित है, क्योंकि दोहे पीढ़ियों तक बोलकर आगे बढ़े।
खोजिए: दोहा और उसकी सीख।
- हर दोहे को उसकी सीख से मिलाइए।
Remember
- सुई-तलवार: हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व है।
- तरुवर-सरवर: सज्जन परहित के लिए धन जोड़ते हैं; प्रेम का धागा टूटे तो गाँठ पड़ जाती है।
Quick check
“जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि” का भाव क्या है?
- हर चीज़ का अपना महत्व है
- तलवार बड़ी है
- सुई बेकार है
- तलवार से सिलते हैं
Answer
हर चीज़ का अपना महत्व है. छोटी चीज़ को तुच्छ न समझें।
Think about it
प्रेम के लिए धागे की जगह आप कौन-सा उदाहरण देंगे?
One answer
जैसे काँच का गिलास: टूट जाए तो जोड़ने पर भी दरार दिखती है। या मोती की माला: एक बार बिखरे तो सारे मोती फिर से पिरोना कठिन है।
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