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पढ़ें: बिस्मिल और उनकी आत्मकथा

Class 6 Hindi · Chapter 6: मेरी माँ · NCERT मल्हार section पृ. 51–52

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पढ़ने से पहले: आपके जीवन में आपकी माँ (या कोई बड़ा) आपको कैसे हिम्मत देती हैं? यह पाठ एक महान क्रांतिकारी का अपनी माँ के प्रति आभार है।

बिस्मिल कौन थे (हमारे शब्दों में): रामप्रसाद “बिस्मिल” (1897–1927) का जन्म तब हुआ जब भारत पर अंग्रेज़ों का शासन था। छोटी उम्र से ही वे देश की आज़ादी के लिए लड़ने लगे। अंग्रेज़ों ने उन्हें जेल में डाला और फ़ाँसी की सज़ा दी। भगत सिंह ने उनके बारे में कहा था कि वे होनहार नौजवान, गज़ब के शायर और बहुत योग्य थे। “सरफ़रोशी की तमन्ना” जैसा जोशीला तराना उन्हीं का है।

जेल में लिखी आत्मकथा: बिस्मिल ने जेल में छिपकर अपनी आत्मकथा लिखी और चोरी-छिपे बाहर भेजते रहे। साथियों ने उसे “निज जीवन की एक छटा” नाम से छपवा दिया। इस पुस्तक से लोगों में अंग्रेज़ों के विरुद्ध गुस्सा और बढ़ा। इस तरह फ़ाँसी देकर भी अंग्रेज़ उन्हें हरा नहीं सके। “मेरी माँ” इसी आत्मकथा का एक अंश है।

आत्मकथा क्या है? आत्म = अपना, कथा = कहानी। अपने जीवन की कहानी स्वयं लिखना आत्मकथा है। इसमें लेखक “मैं” में लिखता है: “मेरी बड़ी इच्छा थी…”, “मैंने तुरंत उत्तर दिया…”। ऐसी पंक्तियों से पता चलता है कि लेखक अपने बारे में कह रहा है।

खोजिए: सही या गलत?

  1. हर कथन को सही समूह में रखिए।

Remember

  • रामप्रसाद बिस्मिल (1897–1927) क्रांतिकारी, कवि और लेखक थे; उन्हें 30 वर्ष की आयु में फ़ाँसी दी गई।
  • आत्मकथा = अपनी कहानी स्वयं लिखना; यह “मैं” में लिखी जाती है।

Quick check

बिस्मिल की आत्मकथा का नाम क्या था?

  1. निज जीवन की एक छटा
  2. मेरी माँ
  3. गोल
  4. सरफ़रोशी की तमन्ना
Answer

निज जीवन की एक छटा. उसे उनके साथियों ने छपवाया।

Think about it

बिस्मिल की आत्मकथा से अंग्रेज़ों के “होश क्यों उड़ गए”?

One answer

क्योंकि उसमें सच्चाई और देशभक्ति की ऐसी बातें थीं जिनसे लोगों में अंग्रेज़ों के विरुद्ध गुस्सा और आज़ादी का जोश बढ़ गया, और यह बात फ़ाँसी से भी रोकी नहीं जा सकी।

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