पढ़ें: कविता का भाव
Class 6 Hindi · Chapter 11: चेतक की वीरता · NCERT मल्हार section पृ. 122–123
Seekho
पढ़ने से पहले: हल्दीघाटी (राजस्थान) में महाराणा प्रताप ने मुगल सेना से वीरता से युद्ध किया था (सन् 1576)। उनका प्रिय घोड़ा चेतक अपनी फुर्ती और वफ़ादारी के लिए अमर है। अपनी किताब में श्यामनारायण पाण्डेय की कविता “चेतक की वीरता” पढ़िए; यह उनके काव्य “हल्दीघाटी” का अंश है।
हवा से भी तेज़ (हमारे शब्दों में): युद्ध के बीच चौकड़ी भरता (उछलता-कूदता) चेतक निराला बन गया था। कवि कहते हैं कि हवा का पाला चेतक से पड़ गया था, यानी दोनों में तेज़ दौड़ की होड़ थी। राणा को उस पर कोड़ा चलाने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ी। वह शत्रुओं के सिरों के ऊपर से ऐसे दौड़ता, मानो आसमान में दौड़ रहा हो।
मालिक के मन की समझ: लगाम ज़रा-सी हवा से हिलती, और चेतक सवार (राणा) को लेकर उड़ जाता। राणा की आँख की पुतली घूमे, उससे पहले ही चेतक उस दिशा में मुड़ जाता; वह मालिक का भाव पहले ही समझ लेता था। उसने भयानक भालों, ढालों और तलवारों (करवालों) के बीच भी निडर होकर अपना कौशल दिखाया।
युद्धभूमि में हर जगह: पल में यहाँ, पल में वहाँ: युद्धभूमि में कोई जगह ऐसी नहीं थी जहाँ चेतक न पहुँचा हो। वह उफनती नदी की तरह लहराता, फिर ठहर जाता, और भयानक वज्र भरे बादल की तरह शत्रु सेना पर टूट पड़ता। शत्रुओं के भाले और तरकश (निषंग) गिर गए, घोड़े की टापों से उनके अंग घायल हो गए, और घोड़े का ऐसा रंग देखकर पूरा शत्रु-समाज दंग रह गया।
खोजिए: चेतक के गुण।
- हर बात को चेतक के गुण से मिलाइए।
Yaad rakho
- चेतक हवा से तेज़ दौड़ता और राणा के मन का भाव पहले ही समझ लेता था।
- वह भालों-तलवारों में निडर होकर वज्र भरे बादल-सा शत्रु सेना पर टूट पड़ता था।
Quick check
चेतक किसका घोड़ा था?
- महाराणा प्रताप
- शिवाजी
- अकबर
- पृथ्वीराज
Answer
महाराणा प्रताप. हल्दीघाटी के युद्ध की कथा।
Socho
चेतक को राणा पर कोड़ा चलाने की ज़रूरत क्यों नहीं पड़ती थी?
Ek answer
क्योंकि चेतक इतना समझदार और फुर्तीला था कि लगाम ज़रा-सी हिलते ही या राणा की नज़र घूमते ही वह उनका इशारा समझकर दौड़ पड़ता था।
Practice
Teen levels (easy, medium, hard) ke naye sawaalon se practice karo, kuch hands-on, hints aur hal ke saath. Topic poora karne ke liye pichhle 5 mein se 4 sahi karo.