पढ़ें: प्रकाश, फूल और बलिदान
Class 6 Hindi · Chapter 13: पेड़ की बात · NCERT मल्हार section पृ. 146–149
Seekho
पत्तों के मुँह: पत्ते हवा से भी आहार लेते हैं। उनमें अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं (सूक्ष्मदर्शी से उन पर होंठ भी दिखते हैं), जो ज़रूरत न हो तो बंद हो जाते हैं। हम साँस छोड़ते हैं तो एक विषैली वायु निकलती है, जिसे लेखक “अंगारक” वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) कहते हैं। यह धरती पर जमा होती रहे तो सब जीव नष्ट हो जाएँ; पर पेड़ सूर्य-प्रकाश की ऊर्जा से इसी वायु से अंगार (कार्बन) लेकर अपना शरीर बनाते हैं और हवा शुद्ध कर देते हैं।
प्रकाश ही जीवन का मूल मंत्र: पेड़-पौधे प्रकाश के बिना नहीं बच सकते। खिड़की के पास रखे पौधे की डालियाँ प्रकाश की ओर मुड़ जाती हैं; जंगल में पेड़ ऊपर उठने की होड़ करते हैं, और बेलें पेड़ों से लिपटकर ऊपर चढ़ती हैं। पेड़ों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें बँधी हैं: लकड़ी जलाने पर जो प्रकाश और ताप निकलता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है। पशु पेड़-पौधे खाते हैं और हम अनाज-सब्ज़ी; यानी हम भी प्रकाश की खुराक से ही जीवित हैं।
फूल और मित्र: पेड़ मरने से पहले संतान (बीज) छोड़ जाना चाहते हैं, और बीज की रक्षा के लिए फूल का सुंदर घर बनाते हैं। लेखक कहते हैं कि माँ की ममता ही वह पारस पत्थर है जिसके छूने से मिट्टी और अंगार भी फूल बन जाते हैं। फूल खिलने पर पेड़ मानो अपने मित्रों को बुलाता है: रंग-बिरंगी पंखुड़ियाँ निशान हैं, और रात में निकलने वाले पतंगों के लिए सुगंध। मधुमक्खी और तितली फूलों का शहद पीती हैं और पराग-कण एक फूल से दूसरे पर ले जाती हैं; पराग-कण के बिना बीज नहीं पकता।
पेड़ का बलिदान: अपने शरीर का रस पिलाकर पेड़ बीजों को पालता है और तिल-तिल करके संतान के लिए सब कुछ लुटा देता है। जो शरीर हरा-भरा था, वह सूख जाता है; जो डालियाँ हवा के साथ नाचती थीं, वे अब हवा का एक थपेड़ा भी नहीं सह पातीं। एक-एक करके डालियाँ टूटती हैं, और एक दिन पेड़ जड़ सहित गिर पड़ता है। लेखक से परिचय: जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) ने सिद्ध किया कि पौधे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं और दूसरे जीवों जैसे ही हैं; उन्होंने रेडियो तरंगों से संचार की भी बड़ी खोज की थी।
खोजिए: बीज से बीज तक।
- पेड़ के जीवन-चक्र को क्रम से लगाइए।
Yaad rakho
- पत्ते सूर्य-प्रकाश से अंगारक वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) को शुद्ध करके भोजन बनाते हैं; प्रकाश ही जीवन का मूल मंत्र है।
- मधुमक्खियाँ पराग-कण पहुँचाती हैं; पेड़ बीजों के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है।
Quick check
पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?
- विषैली वायु लेकर हवा शुद्ध करते हैं
- हमारी तरह साँस लेते हैं
- हमारे साथ जन्मे हैं
- हमारी तरह खाते हैं
Answer
विषैली वायु लेकर हवा शुद्ध करते हैं. जो हमारे लिए ज़हर है, उसी से पेड़ अपना शरीर बनाते हैं।
Socho
पेड़ के गिरने के बाद क्या होता होगा?
Ek answer
उसके बीज मिट्टी में गिरकर वर्षा आने पर नए अंकुर बनते हैं, और गिरा हुआ पेड़ धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी को उपजाऊ बनाता है; इस तरह जीवन-चक्र चलता रहता है।
Practice
Teen levels (easy, medium, hard) ke naye sawaalon se practice karo, kuch hands-on, hints aur hal ke saath. Topic poora karne ke liye pichhle 5 mein se 4 sahi karo.