Chapter 3: पहली बूँद
इस कविता में कवि गोपालकृष्ण कौल वर्षा की पहली बूँद के धरती पर गिरने का सुंदर दृश्य रचते हैं, जिसमें बादल, बिजली और आकाश नए-नए रूपों में दिखते हैं। कविता अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से उसका भाव, कवि की कल्पना और नए शब्द समझिए।
Is chapter mein tum
- कविता का भाव अपने शब्दों में बताना
- कवि की कल्पना (सीधा अर्थ और भावार्थ) समझना
- एक शब्द के अनेक अर्थ, “धर” वाले शब्द और समानार्थी शब्द सीखना
- बारिश और वाद्यों पर बोलना-लिखना
Topics
- पढ़ें: कविता का भाव NCERT पृ. 25–26
पहली बूँद से धरती पर अंकुर फूटे और हरी दूब मुस्काई।
- पाठ से: समझ और कविता की रचना NCERT पृ. 26–28
आकाश = नीली आँख, बादल = काली पुतली, बारिश = करुणा के आँसू।
- शब्दों की बात NCERT पृ. 28–29
एक शब्द के अनेक अर्थ: फूट = उगना, टूटना, झगड़ा।
- पाठ से आगे NCERT पृ. 29–32
नगाड़ा, ढोलक, डमरू, डफली चोट करके बजते हैं; नगाड़े जोड़े में भी बजते हैं।
Key words
- पावस
- वर्षा ऋतु
- अंकुर
- बीज से निकला नन्हा पौधा
- जलधर
- जल धारण करने वाला: बादल या समुद्र
- अंबर
- आकाश
- तरुणाई
- जवानी, नई ताज़गी
- शस्य-श्यामला
- फसलों से हरी-भरी
Summary
- पहली बूँद से धरती पर अंकुर फूटे और दूब मुस्काई।
- बादल = उड़ता सागर, बिजली = सुनहरे पंख, गर्जना = नगाड़े।
- नीला आकाश आँख, काले बादल पुतली, बारिश करुणा के आँसू।
- फूट के अनेक अर्थ; जलधर, गिरिधर, हलधर; नयन = आँख।