Chapter 6: मेरी माँ
यह पाठ क्रांतिकारी रामप्रसाद “बिस्मिल” की आत्मकथा का अंश है, जिसमें वे अपनी माँ के साहस, शिक्षा-प्रेम और स्नेह को याद करते हुए उनका आभार मानते हैं। पाठ अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से उसे समझिए, आत्मकथा की विशेषताएँ जानिए और विशेषण पहचानिए।
Is chapter mein tum
- बिस्मिल के जीवन और उनकी माँ के गुणों के बारे में बताना
- आत्मकथा की विशेषताएँ पहचानना
- शब्दों के छोटे रूप और विशेषण पहचानना
- अपनी माँ या अभिभावक से बातचीत करके उनके बारे में जानना
Topics
- पढ़ें: बिस्मिल और उनकी आत्मकथा NCERT पृ. 51–52
रामप्रसाद बिस्मिल (1897–1927) क्रांतिकारी, कवि और लेखक थे; उन्हें 30 वर्ष की आयु में फ़ाँसी दी गई।
- पढ़ें: माँ का साथ और सत्य का आचरण NCERT पृ. 52–53
माँ ने हर कदम पर बिस्मिल के उत्साह और साहस का साथ दिया।
- पढ़ें: माँ के प्रति आभार NCERT पृ. 53–54
माँ का सबसे बड़ा आदेश: किसी के प्राण न लेना।
- भाषा और पाठ से आगे NCERT पृ. 57–59
शब्दों को मिलाकर छोटा करते हैं: अक्षर-बोध, पढ़ना-लिखना, देश-सेवा, भोजनादि।
Key words
- आत्मकथा
- अपने जीवन की कहानी स्वयं लिखना
- क्रांतिकारी
- देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाला
- प्रोत्साहन
- हिम्मत बढ़ाना
- दृढ़ता
- अपने निश्चय पर अटल रहना
- ऋण
- कर्ज़; किसी का उपकार
- उदार
- खुले और बड़े दिल वाला
Summary
- बिस्मिल ने जेल में छिपकर आत्मकथा लिखी; “मेरी माँ” उसका अंश है।
- माँ ने परिवार के विरोध के बावजूद बेटे के उत्साह और शिक्षा का साथ दिया।
- माँ ने खुद अपनी इच्छाशक्ति से पढ़ना-लिखना सीखा; उनका सबसे बड़ा आदेश था किसी के प्राण न लेना।
- बिस्मिल ने माँ का ऋण कभी न उतर पाने की बात कहकर उनका आभार माना।