Chapter 11: चेतक की वीरता
श्यामनारायण पाण्डेय की इस वीर रस की कविता में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की हवा से तेज़ दौड़, समझदारी और निर्भीकता का वर्णन है। कविता अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से उसका भावार्थ, तुक, समानार्थी शब्द और शब्द के भीतर छिपे शब्द समझिए।
In this chapter you will
- कविता का भावार्थ अपने शब्दों में बताना
- तुकांत शैली और प्रभावशाली प्रयोग पहचानना
- कठिन शब्दों और समानार्थी शब्दों के अर्थ जानना
- शब्द के भीतर शब्द खोजना और पहेलियाँ बूझना
Topics
- पढ़ें: कविता का भाव NCERT पृ. 122–123
चेतक हवा से तेज़ दौड़ता और राणा के मन का भाव पहले ही समझ लेता था।
- पाठ से: भावार्थ और पंक्तियों पर चर्चा NCERT पृ. 124–125
अरि = शत्रु, बाग = लगाम, करवाल = तलवार, निषंग = तरकश, हय = घोड़ा।
- कविता की रचना और शब्दों की बात NCERT पृ. 125–127
तुकांत कविता में पंक्तियों के अंत की ध्वनि मिलती है: कोड़ा-घोड़ा, चालों-भालों।
- पाठ से आगे: पहेलियाँ और खोजबीन NCERT पृ. 126–127
महाराणा प्रताप मेवाड़ के वीर राजा थे; हल्दीघाटी का युद्ध 1576 में हुआ।
Key words
- वीर रस
- उत्साह और जोश जगाने वाला भाव
- अरि
- शत्रु
- करवाल
- तलवार
- निषंग
- तरकश
- हय
- घोड़ा
- निर्भीक
- निडर
Summary
- चेतक हवा से तेज़ दौड़ता था; राणा को कोड़ा चलाने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी।
- वह राणा की नज़र घूमने से पहले ही उनका भाव समझ लेता था।
- भालों-तलवारों में निडर होकर वह वज्र भरे बादल-सा शत्रु सेना पर टूट पड़ता।
- तुकांत शैली: कोड़ा-घोड़ा; हय, अश्व, तुरंग = घोड़ा।