Chapter 13: पेड़ की बात
महान वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु के इस लेख में बीज से अंकुर, पेड़ का भोजन, प्रकाश का महत्व, फूल और मधुमक्खियों की मित्रता, और संतान के लिए पेड़ के बलिदान की कहानी है। लेख अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से पेड़ का जीवन-चक्र, लेख की रचना और विशेषण समझिए।
In this chapter you will
- बीज से पेड़ बनने की प्रक्रिया बताना
- पेड़ का भोजन, प्रकाश और हवा शुद्ध करने का महत्व समझाना
- लेख की रचना और उसके प्रयोग-उदाहरण पहचानना
- विशेषण चुनना, शब्दकोश के संकेत समझना और अंकुरण का प्रयोग करना
Topics
- पढ़ें: बीज से पेड़ तक NCERT पृ. 145–146
वर्षा के बाद बीज का ढक्कन दरका और अंकुर निकला: नीचे जड़, ऊपर तना।
- पढ़ें: प्रकाश, फूल और बलिदान NCERT पृ. 146–149
पत्ते सूर्य-प्रकाश से अंगारक वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) को शुद्ध करके भोजन बनाते हैं; प्रकाश ही जीवन का मूल मंत्र है।
- पाठ से: लेख की रचना और शब्दों के रूप NCERT पृ. 150–153
लेख में विचार क्रम से हैं और बात उदाहरणों-प्रयोगों से समझाई गई है।
- पाठ से आगे: मेरे प्रिय और देश-प्रेम का गीत NCERT पृ. 154–156
शब्दकोश में शब्द वर्णमाला के क्रम में होते हैं; पु., स्त्री., वि. जैसे संकेत व्याकरण बताते हैं।
Key words
- अंकुर
- बीज से निकला नन्हा पौधा
- सूक्ष्मदर्शी
- बहुत बारीक चीज़ें दिखाने वाला यंत्र
- अंगारक वायु
- कार्बन डाइऑक्साइड
- पराग-कण
- फूल के भीतर की धूल
- संतान
- अगली पीढ़ी; पेड़ के लिए बीज
- न्योछावर
- पूरी तरह अर्पण करना
Summary
- वर्षा के बाद बीज से अंकुर निकलता है: जड़ नीचे, तना ऊपर; उल्टा रखने पर भी पौधा ऊपर मुड़ जाता है।
- जड़ें मिट्टी से रस और पत्ते सूर्य-प्रकाश से अंगारक वायु को शुद्ध करके भोजन बनाते हैं।
- प्रकाश ही जीवन का मूल मंत्र है; मधुमक्खियाँ पराग-कण पहुँचाकर बीज बनने में मदद करती हैं।
- पेड़ अपनी संतान (बीजों) के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है।