पाठ से: समझ और कविता की रचना
Class 6 Hindi · Chapter 3: पहली बूँद · NCERT मल्हार section पृ. 26–28
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मिलकर करें मिलान: “आसमान में उड़ता सागर” = बादल; “बजा नगाड़े” = मेघ-गर्जना; “नीले नयनों-सा अंबर” = आकाश; “वसुंधरा की रोमावलि” = हरी दूब।
सोच-विचार के लिए: बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे दिखता है? अंकुर फूटते हैं, दूब उग आती है, धरती मुस्काती है और फिर से हरी-भरी होने को ललचाती है। कविता में आकाश को नीली आँख और बादलों को उसकी काली पुतली के समान बताया गया है।
कविता की रचना: “आसमान में उड़ता सागर” का सीधा अर्थ असंभव है: समुद्र आकाश में कैसे उड़ेगा? पर इसका भावार्थ सुंदर है: समुद्र का पानी भाप बनकर बादल बना और बिजली के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग कविता को सुंदर और आनंददायक बनाते हैं। कविता में धरती को मनुष्य जैसा दिखाया गया है: उसके होंठ हैं, वह प्यासी है, मुस्काती है, बूढ़ी है और ललचाती है।
बार-बार आने वाली पंक्ति: “पहली बूँद धरा पर आई” कविता में बार-बार आती है। इससे कविता का मुख्य भाव याद रहता है और उसे गाने में लय बनती है। कविता को साथियों के साथ लय में गाकर पढ़िए।
खोजिए: धरती मनुष्य जैसी।
- हर शब्द को उसके भाव से मिलाइए।
Remember
- आकाश = नीली आँख, बादल = काली पुतली, बारिश = करुणा के आँसू।
- सीधा अर्थ और भावार्थ अलग हो सकते हैं; कविता में धरती को मनुष्य जैसा दिखाया गया है।
Quick check
कविता में “काली पुतली” क्या है?
- बादल
- बूँदें
- धरती
- नगाड़ा
Answer
बादल. नीले आकाश की आँख में काले बादल पुतली जैसे।
Think about it
आप बादलों की तुलना किससे करेंगे? एक पंक्ति लिखिए।
One answer
जैसे: “काले बादल आसमान में ऐसे दौड़ रहे हैं जैसे हाथियों का झुंड पानी पीने जा रहा हो।”
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