Chapter 4: हार की जीत
सुदर्शन की यह प्रसिद्ध कहानी बाबा भारती, उनके प्यारे घोड़े सुलतान और डाकू खड्गसिंह की है, जिसमें घोड़ा हारकर भी बाबा भारती डाकू का मन जीत लेते हैं। कहानी अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से घटनाएँ, पात्र, मुहावरे और मन के भाव समझिए।
In this chapter you will
- कहानी की घटनाएँ क्रम से सुनाना
- शीर्षक और पात्रों के गुण (विशेषण) समझना
- कहानी के मुहावरों का अर्थ और प्रयोग जानना
- पात्रों के मन के भाव पहचानना और कहानी नए ढंग से कहना
Topics
- पढ़ें: बाबा भारती और सुलतान NCERT पृ. 33–35
बाबा भारती को अपना घोड़ा सुलतान प्राणों से प्यारा था।
- पढ़ें: धोखा और पश्चाताप NCERT पृ. 35–38
खड्गसिंह ने अपाहिज बनकर धोखे से घोड़ा छीना।
- पाठ से: शीर्षक, पात्र और दिनचर्या NCERT पृ. 39–42
“हार की जीत”: घोड़ा हारकर भी बाबा ने डाकू का मन जीता।
- भाषा और पाठ से आगे: मुहावरे और मन के भाव NCERT पृ. 41–44
मुहावरे: लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, हवा से बातें करना।
Key words
- अस्तबल
- घोड़ों के रहने का स्थान
- अपाहिज
- जिसका कोई अंग काम न करता हो
- पश्चाताप
- अपनी गलती पर दुख
- कीर्ति
- प्रसिद्धि, यश
- असावधान
- जो सावधान न हो, लापरवाह
- विशेषण
- गुण या विशेषता बताने वाला शब्द
Summary
- बाबा भारती को सुलतान प्राणों से प्यारा था; खड्गसिंह उसे देखकर ललचा गया।
- खड्गसिंह ने अपाहिज बनकर धोखे से घोड़ा छीना।
- बाबा ने केवल यही माँगा कि घटना छिपाई जाए, ताकि गरीबों पर विश्वास बना रहे।
- डाकू का हृदय बदला; उसने घोड़ा लौटाया। हारकर भी बाबा जीत गए।