पढ़ें: कविता का भाव
Class 6 Hindi · Chapter 7: जलाते चलो · NCERT मल्हार section पृ. 60–61
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पढ़ने से पहले: जब चारों ओर अँधेरा हो और एक छोटा-सा दीया जल उठे, तो क्या होता है? थोड़ी-सी रोशनी भी रास्ता दिखा देती है। अपनी किताब में द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविता “जलाते चलो” पढ़िए।
मुख्य संदेश (हमारे शब्दों में): कवि कहते हैं कि स्नेह (प्रेम; दीये का तेल भी) भर-भरकर दीये जलाते रहो, कभी न कभी धरती का अँधेरा ज़रूर मिटेगा। यहाँ दीया भलाई, प्रेम और आशा का प्रतीक है और अँधेरा बुराई, दुख और अज्ञान का।
विज्ञान और स्नेह: कवि मानते हैं कि विज्ञान में इतनी शक्ति है कि वह अमावस की रात को भी पूर्णिमा जैसा उजला कर दे (बिजली के बल्ब से)। फिर भी आज दुनिया पर दिन में भी अमावस जैसा अँधेरा क्यों छा रहा है? क्योंकि बिना स्नेह (प्रेम) के जलने वाले बिजली के दीयों से सच्चा रास्ता नहीं मिलेगा। यानी केवल तरक्की नहीं, दूसरों की भलाई भी ज़रूरी है।
मनुष्य का साहस: कवि मनुष्य से कहते हैं: तुम्हीं ने सबसे पहले दीया जलाकर अँधेरे की चुनौती स्वीकार की थी; अँधेरे की नदी पार करने को दीये की नाव बनाई थी। उस नाव को निरंतर चलाते रहो, कभी तो किनारा मिलेगा। युगों से तुमने अनगिनत दीये जलाए, हवा ने उन्हें बुझाया भी, पर बुझते-बुझते भी वे जो ज्योति दे गए, उसी से उजाला मिलेगा। दीये और तूफ़ान की यह कहानी चलती रहेगी, पर अगर धरती पर एक भी दीया बचा रहा, तो रात को सवेरा ज़रूर मिलेगा।
खोजिए: प्रतीक पहचानिए।
- हर शब्द को उसके प्रतीक-अर्थ से मिलाइए।
Remember
- प्रेम और भलाई के दीये जलाते रहो, अँधेरा (बुराई, दुख) कभी न कभी मिटेगा।
- बिना स्नेह के केवल विज्ञान की चमक से सच्चा रास्ता नहीं मिलता।
Quick check
कविता में मुख्य रूप से क्या कहा गया है?
- भलाई के कार्य करते रहना
- दीपावली मनाना
- बल्ब जलाना
- नाव चलाना
Answer
भलाई के कार्य करते रहना. दीये भलाई के प्रतीक हैं।
Think about it
“रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा” से आप क्या समझते हैं?
One answer
अगर दुनिया में एक भी व्यक्ति अच्छाई और आशा बनाए रखे, तो अंत में बुराई और दुख ज़रूर हारेंगे; इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए।
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