Chapter 1: मातृभूमि
इस कविता में कवि सोहनलाल द्विवेदी भारत की प्राकृतिक सुंदरता और उसके गौरवशाली इतिहास का गान करते हैं। कविता अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से उसका भाव समझिए, नए शब्द सीखिए और अपनी धरती के बारे में बोलिए-लिखिए।
Is chapter mein tum
- कविता का भाव अपने शब्दों में बताना
- कविता के नामों और शब्दों के अर्थ समझना
- दोहराए गए शब्द, “भूमि” से बने शब्द और मात्रा का अंतर पहचानना
- “वंदे मातरम्” से कविता की तुलना करना
Topics
- पढ़ें: कविता का भाव NCERT पृ. 1–2
कविता में भारत की प्रकृति (हिमालय, सागर, नदियाँ, झरने, कोयल, मलय पवन) का वर्णन है।
- पाठ से: समझ और सोच-विचार NCERT पृ. 3–6
कविता के नाम: हिमालय, त्रिवेणी, मलय पवन, सिंधु, रघुपति, गीता, गौतम बुद्ध।
- शब्दों के रूप NCERT पृ. 6–8
दोहराए गए शब्द अक्सर “हर” का भाव देते हैं: पग-पग, घर-घर, देश-देश।
- पाठ से आगे NCERT पृ. 8–12
वंशी (बाँसुरी), शहनाई, शंख, बीन फूँककर बजते हैं।
Key words
- मातृभूमि
- माँ के समान अपनी जन्म की धरती
- सिंधु
- समुद्र; एक नदी
- त्रिवेणी
- तीन नदियों का संगम
- अमराई
- आम के पेड़ों का बगीचा
- मलय पवन
- मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित हवा
- पुनीत
- पवित्र
Summary
- हिमालय आकाश छूता है, सागर चरणों में लहराता है, नदियाँ और झरने छटा बिखेरते हैं।
- यह राम, सीता, श्रीकृष्ण और बुद्ध की धरती है।
- पग-पग = हर कदम पर; भूमि से नए शब्द; दया-दिया में एक मात्रा का अंतर।
- “वंदे मातरम्” भी धरती को माँ मानकर प्रणाम करता है।