पढ़ें: कविता का भाव
Class 6 Hindi · Chapter 1: मातृभूमि · NCERT मल्हार section पृ. 1–2
Seekho
पढ़ने से पहले: अपनी आँखें बंद कीजिए और भारत के बारे में सोचिए। आपके मन में कौन-से चित्र आते हैं? ऊँचे पहाड़, बहती नदियाँ, खेत, त्योहार या कोई महापुरुष? अब अपनी किताब में सोहनलाल द्विवेदी की कविता “मातृभूमि” पढ़िए।
प्रकृति की सुंदरता (हमारे शब्दों में): कवि बताते हैं कि भारत की उत्तर दिशा में हिमालय इतना ऊँचा खड़ा है मानो आकाश को छू रहा हो, और नीचे दक्षिण में सागर (सिंधु) उसके चरणों में लहराता है। गंगा, यमुना और त्रिवेणी की लहरें हर कदम पर चमकती छटा बिखेरती हैं। पहाड़ों से झरने गिरते हैं और झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्ती से चहकती हैं। आम के घने बगीचों (अमराइयों) में कोयल कूकती है और मलय पवन तन-मन को ताज़ा कर देती है।
गौरव का गान: कवि याद दिलाते हैं कि इसी धरती पर श्रीराम (रघुपति) और सीता का जन्म हुआ, श्रीकृष्ण ने बाँसुरी बजाई और गीता का पवित्र संदेश दिया, और गौतम बुद्ध ने दुनिया को दया सिखाकर ज्ञान का दीपक दिखाया। इसलिए कवि इस धरती को अपनी पुण्यभूमि, स्वर्णभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्धभूमि, बुद्धभूमि, और सबसे बढ़कर अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि कहते हैं।
कवि से परिचय: सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) का जन्म तब हुआ जब भारत पर अंग्रेज़ों का शासन था। उन्होंने अपनी लेखनी से अंग्रेज़ों का विरोध किया। उनका प्रिय विषय था देशभक्ति। उनकी कुछ और प्रसिद्ध रचनाएँ हैं: “बढ़े चलो, बढ़े चलो” और “कोशिश करने वालों की हार नहीं होती”।
खोजिए: कविता में क्या-क्या है?
- हर नाम को सही समूह में रखिए।
Yaad rakho
- कविता में भारत की प्रकृति (हिमालय, सागर, नदियाँ, झरने, कोयल, मलय पवन) का वर्णन है।
- राम, सीता, श्रीकृष्ण और बुद्ध की धरती होने का गौरव भी कविता में है।
Quick check
कविता में आकाश को कौन चूमता है?
- ऊँचा हिमालय
- गंगा
- कोयल
- मलय पवन
Answer
ऊँचा हिमालय. हिमालय की ऊँचाई का सुंदर वर्णन।
Socho
कवि भारत को “मातृभूमि” यानी माँ के समान भूमि क्यों कहते हैं?
Ek answer
क्योंकि जैसे माँ हमें जन्म देती है, पालती है और हर ज़रूरत पूरी करती है, वैसे ही यह धरती हमें अन्न, जल, हवा और पहचान देती है।
Practice
Teen levels (easy, medium, hard) ke naye sawaalon se practice karo, kuch hands-on, hints aur hal ke saath. Topic poora karne ke liye pichhle 5 mein se 4 sahi karo.