Chapter 5: रहीम के दोहे
इस पाठ में भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि रहीम के सात दोहे हैं, जो प्रेम, परोपकार, मित्रता, वाणी और हर चीज़ के महत्व की सीख देते हैं। दोहे अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से हर दोहे का भाव, पुराने शब्दों के अर्थ और एक शब्द के अनेक अर्थ समझिए।
Is chapter mein tum
- हर दोहे का भाव अपने शब्दों में बताना
- दोहों के पुराने शब्दों के अर्थ जानना
- एक शब्द के अनेक अर्थ पहचानना
- दोहे की बनावट समझना और दोहे गाना
Topics
- पढ़ें: प्रेम, परोपकार और छोटे का महत्व NCERT पृ. 45–46
सुई-तलवार: हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व है।
- पढ़ें: पानी, वाणी, विपत्ति और सच्चे मित्र NCERT पृ. 46–47
“पानी” के तीन अर्थ: मोती की चमक, मनुष्य का सम्मान, चूने का जल।
- शब्दों की बात NCERT पृ. 47–49
तरुवर = पेड़, सरवर = तालाब, मीत = मित्र, जिह्वा = जीभ, कपाल = सिर।
- पाठ से आगे: दोहों का आनंद NCERT पृ. 49–50
दोहे में दो पंक्तियाँ, बीच में ठहराव और अंत में तुक होती है।
Key words
- दोहा
- दो पंक्तियों की छोटी कविता
- नीति
- अच्छे आचरण की सीख
- परोपकार
- दूसरों की भलाई
- विपत्ति
- संकट, मुसीबत
- कसौटी
- परखने का पत्थर; परीक्षा
- सुजान
- सज्जन, समझदार
Summary
- सुई-तलवार: हर चीज़ का अपना महत्व है।
- पेड़-तालाब की तरह सज्जन परोपकार करते हैं; प्रेम का धागा सँभालकर रखो।
- “पानी” = चमक, सम्मान, जल; सोच-समझकर बोलो।
- विपत्ति में ही सच्चे मित्र की पहचान होती है।