भाषा की बात: प्रतीक, शब्द-रूप और -सा/-सी/-से
Class 6 Hindi · Chapter 7: जलाते चलो · NCERT मल्हार section पृ. 65–69
Seekho
प्रतीक: “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।” यहाँ निशा का अर्थ केवल रात और सवेरा का अर्थ केवल सुबह नहीं है। निशा = दुख, बुराई, निराशा, अज्ञान; सवेरा = सुख, अच्छाई, आशा, ज्ञान। कविता के शब्दों को बाँटिए: निशा से जुड़े: अँधेरा, अमावस, तिमिर, तूफ़ान, शिला, बुझना; सवेरे से जुड़े: दिये, पूर्णिमा, दिवस, ज्योति, उजेला, लौ, स्वर्ण, जलना, नाव, किनारा।
शब्दों के रूप: अमावस = अमावस्या: अर्थ एक, लिखने-बोलने में थोड़ा अंतर। ऐसे ही: दिया = दीया, दीपक, दीप; उजेला = उजाला; अनगिन = अनगिनत। अर्थ की बात: “जलाते चलो” की जगह “जलाते रहो” कहें तो? “चलो” में आगे बढ़ते जाने का भाव है, “रहो” में एक जगह लगातार करने का। कविता के शब्द बदलें तो अर्थ और सुंदरता, दोनों बदल जाते हैं।
सा/सी/से से समानता: “अमावस निशा-सी”, “स्वर्ण-सी जल रही”। जब सा/सी/से समानता दिखाते हैं, तो उनसे पहले योजक चिह्न (-) लगता है। पुल्लिंग के लिए -सा (चाँद-सा मुखड़ा), स्त्रीलिंग के लिए -सी (फूल-सी कोमल हथेली), बहुवचन के लिए -से (मोती-से दाँत)।
पंक्ति से वाक्य: कविता की पंक्ति को सामान्य वाक्य में बदलिए। “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी” → “तुम्हीं ने पहला दीप जलाकर तिमिर की चुनौती पहली बार स्वीकार की थी।” “बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर” → “तुम वह नाव लगातार बहाते चलो।” कविता में शब्दों का क्रम लय के लिए बदल जाता है।
खोजिए: निशा या सवेरा?
- हर शब्द को सही समूह में रखिए।
Yaad rakho
- निशा = दुख, बुराई; सवेरा = सुख, आशा: ये कविता के प्रतीक हैं।
- समानता में सा/सी/से से पहले योजक: चाँद-सा, फूल-सी, मोती-से।
Quick check
“स्वर्ण-सी लौ” में “-सी” क्या दिखाता है?
- समानता
- संख्या
- समय
- स्थान
Answer
समानता. लौ सोने जैसी चमकती है।
Socho
-सा, -सी, -से से एक-एक वाक्य बनाइए।
Ek answer
“उसका मन बच्चे-सा भोला है।” / “दादी की बातें मिश्री-सी मीठी हैं।” / “आसमान में तारे हीरे-से चमक रहे थे।”
Practice
Teen levels (easy, medium, hard) ke naye sawaalon se practice karo, kuch hands-on, hints aur hal ke saath. Topic poora karne ke liye pichhle 5 mein se 4 sahi karo.