Chapter 9: मैया मैं नहिं माखन खायो
सूरदास के इस प्रसिद्ध पद में नन्हे श्रीकृष्ण माँ यशोदा के सामने बड़ी चतुराई से सिद्ध करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। पद अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से उसका भाव, ब्रजभाषा के शब्द, तुक और पहर से समय का माप समझिए।
In this chapter you will
- पद का भाव अपने शब्दों में बताना
- ब्रजभाषा के शब्दों को आज की हिंदी में बदलना
- तुक और पद की विशेषताएँ पहचानना
- पहर से समय का हिसाब लगाना और दूध से घी की प्रक्रिया समझना
Topics
- पढ़ें: पद और उसका भाव NCERT पृ. 94–95
कृष्ण तर्क देते हैं: दिन भर गायें चराईं, बाँहें छोटी हैं, ग्वाल-बालों ने मुँह पर लगाया।
- पाठ से: शब्द, पंक्तियाँ और पद की रचना NCERT पृ. 96–98
पहर = 3 घंटे; लकुटि-कमरिया = लाठी-कंबल; छीको = लटकता जाल; मधुबन = यमुना किनारे का वन।
- शब्दों के रूप: ब्रजभाषा से आज की हिंदी NCERT पृ. 98–100
पाछे = पीछे, भोरी = भोली, कछु = कुछ, लै = लेकर, नहिं = नहीं।
- पाठ से आगे: समय, दूध और विशेष क्षमता NCERT पृ. 101–104
1 पहर = 3 घंटे; दिन-रात में 8 पहर; दोपहर लगभग 12 बजे।
Key words
- पद
- गाने के लिए रची गई छोटी कविता
- ब्रजभाषा
- ब्रज क्षेत्र की भाषा
- पहर
- तीन घंटे का समय
- छीका
- छत से लटका रस्सियों का जाल
- तुक
- पंक्तियों के अंत की मिलती-जुलती ध्वनि
- बाल-लीला
- बचपन के खेल और शरारतें
Summary
- कृष्ण तर्क देते हैं कि दिन भर गायें चराईं, बाँहें छोटी हैं और ग्वाल-बालों ने मुँह पर माखन लगाया।
- अंत में यशोदा मुस्कराकर कृष्ण को गले लगा लेती हैं।
- पाछे = पीछे, भोरी = भोली; पद की हर पंक्ति की तुक मिलती है।
- 1 पहर = 3 घंटे; दूध → दही → मक्खन → घी।