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Chapter 2: गोल

यह पाठ “हॉकी के जादूगर” मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का एक अंश है, जिसमें वे बताते हैं कि उन्होंने बदला कैसे लिया और सफलता का असली मंत्र क्या है। पाठ अपनी किताब “मल्हार” में पढ़िए, फिर इन विषयों से उसे समझिए, शब्द-युग्म सीखिए और डायरी लिखना शुरू कीजिए।

Is chapter mein tum

  • ध्यानचंद के जीवन और खेल भावना के बारे में बताना
  • संस्मरण की विशेषताएँ पहचानना
  • शब्द-युग्म, योजक चिह्न और बल देने वाले शब्दों का प्रयोग करना
  • आँखों देखा हाल सुनाना और डायरी लिखना

Topics

  1. पढ़ें: बदला लेने का अनोखा ढंग NCERT पृ. 13

    1933 के मैच में चोट खाकर भी ध्यानचंद ने छह गोल करके “बदला” लिया।

  2. पढ़ें: हॉकी का जादूगर NCERT पृ. 14–15

    जन्म 1905 (प्रयाग), 16 वर्ष में सेना, 1936 बर्लिन ओलंपिक में कप्तान और स्वर्ण पदक।

  3. भाषा की बात: शब्द-युग्म और बल देने वाले शब्द NCERT पृ. 16–19

    शब्द-युग्म के बीच योजक चिह्न (-) लगता है: जैसे-जैसे, धक्का-मुक्की, हार-जीत।

  4. पाठ से आगे: खेल, डायरी और डाँडी NCERT पृ. 19–24

    डायरी में अपने विचार और अनुभव ईमानदारी से, तारीख के साथ लिखते हैं।

Key words

संस्मरण
अपनी यादों पर आधारित सच्चा लेख
खेल भावना
हार-जीत को सम्मान से स्वीकारना और नियमों से खेलना
लगन
किसी काम में पूरा मन लगाना
साधना
लगातार अभ्यास
छावनी
सैनिकों के रहने का क्षेत्र
शब्द-युग्म
योजक से जुड़े दो शब्द

Summary

  • ध्यानचंद ने गुस्से का जवाब छह गोल से दिया।
  • लगन, साधना और खेल भावना सफलता के मंत्र हैं।
  • 1936 बर्लिन ओलंपिक में कप्तान के रूप में स्वर्ण; उनका जन्मदिन राष्ट्रीय खेल दिवस है।
  • शब्द-युग्म में योजक चिह्न; ही, भी, तो बल देते हैं।

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